रॉबर्ट कनाडा के एक छोटे शहर में अज्ञेयवादी के रूप में पले-बढ़े। उनका भोगवादी जीवन उन्हें आध्यात्मिक शून्यता की ओर ले गया, जिसके बाद उन्होंने धर्म को जीवन का मार्ग मानना शुरू किया। पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया, पर अंततः उन्हें एहसास हुआ कि केवल इस्लाम ही उस आध्यात्मिक खालीपन को वास्तव में भर सकता है।